बस्ती जिले में रेलवे स्टेशन के पास शुगर मिल गेट पर बन रहे ओवरब्रिज का काम अटक गया है। सेतु निगम की तरफ से हो रहा निर्माण काफी हद तक आगे बढ़ चुका है, लेकिन रेलवे की तरफ से अनुमति न मिलने के कारण आगे का काम रुक गया है। इससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इस ओवरब्रिज से शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने की योजना है, जो यातायात को आसान बनाएगी।
ओवरब्रिज क्यों जरूरी है?
रेलवे लाइन की वजह से बस्ती शहर का आधा हिस्सा कट गया है। पांडेय बाजार और गांधीनगर बाजार अलग-अलग हो गए हैं।
- नई और पुरानी बस्ती के बीच सीधा रास्ता नहीं है।
- रोजाना हजारों वाहन और लोग रेलवे क्रॉसिंग पर इंतजार करते हैं।
- जाम की समस्या बहुत बड़ी है।
ओवरब्रिज बनने के फायदे:
- दोनों बाजार आपस में जुड़ जाएंगे।
- छोटे-बड़े सभी वाहन आसानी से चल सकेंगे।
- पुरानी बस्ती में नई गतिविधियां बढ़ेंगी।
- लगभग 1 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
प्रोजेक्ट की स्थिति क्या है?
सेतु निगम ने करीब एक साल पहले 63.11 करोड़ रुपये की इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया था। शासन से मंजूरी मिलने के बाद काम तेजी से शुरू हुआ।
रेलवे स्टेशन के पूर्वी फाटक नंबर 198बी पर सेतु निगम का हिस्सा लगभग पूरा हो चुका है। अब रेलवे लाइन के ऊपर पुल, पाइलिंग, गर्डर और छत का काम रेलवे को करना है।
वर्तमान समस्या:
- जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिली।
- रेलवे ने फाइल भेजी है, लेकिन मंजूरी लंबित है।
- पाइलिंग और गर्डर का काम अटका हुआ है।
क्रॉसिंग बंद होने की संभावना
रेलवे के हिस्से में काम के लिए 5 महीने तक क्रॉसिंग बंद करने की तैयारी है। इससे पहले वैकल्पिक रास्ते की तलाश की जा रही है ताकि लोगों का आवागमन प्रभावित न हो।
रेलवे के अधिकारी एसडीएम से मिलकर अनुमति के लिए प्रयास कर रहे हैं। सीपीआरओ की सख्ती के बाद इस मामले में तेजी आई है।
ओवरब्रिज प्रोजेक्ट की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| लागत | 63.11 करोड़ रुपये |
| एजेंसी | सेतु निगम (रेलवे हिस्सा अलग) |
| फाटक नंबर | 198बी |
| लाभार्थी | लगभग 1 लाख लोग |
| बंद होने की अवधि | संभावित 5 महीने |
| मुख्य समस्या | अनुमति लंबित |
| पूरा होने के बाद | जाम से मुक्ति, बेहतर कनेक्टिविटी |
आगे क्या हो सकता है?
अगर जल्दी अनुमति मिल गई तो काम तेजी से पूरा होगा। वैकल्पिक मार्ग तैयार करके ही क्रॉसिंग बंद करने की योजना है। स्थानीय प्रशासन और रेलवे के बीच समन्वय से यह समस्या जल्द सुलझ सकती है।





